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01-DC Generator डी.सी.जनरेटर थ्योरी

DC Generator डी.सी.जनरेटर थ्योरी

DC Generator डी.सी. जनरेटर मशीनी मैकेनिकल ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करती है। डी.सी. धारा जनित्र के लिए मैकेनिकल शक्ति का उत्पादन, इंजन, टरबाइन आदि द्वारा किया जाता है। ये जनित्र, किलोवाट से लेकर कई मेगावाट क्षमता तक के बनाए जाते है।

डी० सी० जनित्र के भाग (Parts of D C Generator)-

Main Parts of DC Generator-

1. बॉडी-  मशीन के बाहय भाग को बॉडी या योक कहते हैं। यह कास्ट-आयरन अथवा कास्ट-स्टील से बनाई जाती है।
2. फील्ड पोल- बड़े आकार वाले डायनेमो तथा डी०सी० जनित्र में फील्ड पोल्स प्रयोग किए जाते हैं। फील्ड पोल्स निम्न दो प्रकार के होते हैं-
  • शू सहित लेमिनेटेड पोल
  • मोल्डेड पोल
3. आर्मेचर –  यह एक बेलनाकार ड्रम जैसा होता है जो सिलिकॉन स्टील की पत्तियों को एक साथ रिवेट करके बनाया जाता है।
4. कम्यूटेटर– कम्यूटेटर एक विद्युत घूर्णी युक्ति है, जो स्थायी कार्बन-ब्रशों द्वारा जेनरेटर में आर्मेचर से बाह्य परिपथ को धारा प्रदान करता है और मोटर में बाह्य परिपथ से आर्मेचर को धारा प्रदान करता है।
5. ब्रश तथा ब्रश होल्डर- डी०सी० जनित्र द्वारा उत्पन्न विद्युत वाहक बल को कम्यूटेटर से बाह्य परिपथ को प्रदान करने की जो युक्ति प्रयोग की जाती है, वह ब्रश कहलाती है। ब्रश को ब्रश होल्डर में लगाया जाता है।
6. ब्रश- लीड – ब्रश के साथ जोड़ा गया फ्लेक्सिबल तार का टुकड़ा, ब्रश-लीड या पिग-टेल कहलाता है।
7. रॉकर प्लेट – यह छल्ले के आकार की एक प्लेट होती है जो फ्रन्ट एंड प्लेट के साथ बोल्ट्स द्वारा कसी होती है। रॉकर प्लेट
पर ब्रश-होल्डर फँसा दिए जाते हैं या पेचों से कस दिए जाते है।
8. एंड कवर – जनित्र की बॉडी के दोनों ओर दो कास्ट-आयरन से बने ढक्कन लगाए जाते हैं। इनमें बियरिंग लगी होती हैं और मशीन को ठण्डा रखने के लिए कुछ छिद्र बने होते हैं।
9. बियरिंग – आर्मेचर-शाफ्ट को बियरिंग के द्वारा एंड प्लेट्स पर कसा जाता है। बियरिंग की संख्या दो होती है।
10. शाफ्ट तथा पुली – आर्मेचर तथा कम्यूटेटर के लिए यह आधार का कार्य करती है इसे बियरिंग के द्वारा एंड प्लेट्स पर कस दिया जाता है।
11. कूलिंग फैन – मशीन को ठण्डा रखने के लिए आर्मेचर पर, कम्यूटेटर वाले सिरे के विपरीत सिरे पर, एक कास्ट-आयरन का बना पंखा जड़ दिया जाता है।
12. बेड प्लेट- मशीन के आधार को बेड-प्लेट कहते हैं। यह कास्ट-आयरन से बनाई जाती है और इसे बोल्ट्स के द्वारा फाउण्डेशन पर कस दिया जाता है।
13. आई-बोल्ट –  मशीन को उठाने के लिए प्रायः उसकी बॉडी पर एक गोल छिद्र वाला हुक लगाया जाता है जो आई-बोल्ट कहलाता है।
14. टर्मिनल-बॉक्स – मशीन की बॉडी पर बैकेलाइट की एक मोटी शीट जड़ी रहती है जिस पर नट-बोल्ट के द्वारा आर्मेचर व कम्यूटेटर के संयोजक सिरे कसे होते है। यह व्यवस्था टर्मिनल-बॉक्स कहलाती है।
डी०सी० जनरेटर मुख्यत दो प्रकार का होता है –
1- प्राइम-मूवर के आधार पर
  • जल टरबाइन चालित
  • वाष्प टरबाइन चालित
  • डीजल इंजन चालित
2.उत्तेजना प्रणाली के आधार पर
  • पृथक उत्तेजित जनित्र
  • स्व-उत्तेजित जनित्र
सीरीज जनरेटर –
इस जनित्र में आर्मेचर, फील्ड-बाइन्डिंग तथा लोड, तीनों श्रेणीक्रम में संयोजित किए जाते हैं। फील्ड वाइन्डिग, मोटे तार की तथा कम लपेट वाली बनाई जाती है।
शंट जनरेटर –
इस जनित्र में फील्ड-बाइन्डिंग आर्मेचर के समानान्तर में संयोजित की जाती है और इसके श्रेणीक्रम में रिहोस्टेट संयोजित किया जाता है। समानान्तर संयोजन के कारण फील्ड-बाइन्डिंग पतले तार की बनाई जाती है।
कम्पाउंड जरेटर –
जिस डी ० सी० जनित्र में, फील्ड-बाइन्डिंग को दो भागों में विभक्त कर एक भाग को आर्मेचर के श्रेणीक्रम में और दूसरे भाग को उसके समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है, वह कम्पाउंड जनित्र कहलाता है।
डी०सी०जनरेटर की दक्षता (Efficiency of DC Generator)
जनरेटर द्वारा उत्पन्न आउटपुट वैद्युतिक शक्ति और उसे प्रदान की गई इनपुट यान्त्रिक शक्ति का अनुपात, जनरेटर की दक्षता कहलाता है।

श्रेय – कुछ वाक्य विद्या प्रकाशन द्वारा प्रकाशित इलेक्ट्रीशियन सिद्धांत पुस्तक से लिए गए हैं।

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