Fitter Theory 1st Year | Best Study Material

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04-Marking Tools मार्किंग औजार भाग-01

मार्किंग और मार्किंग औजार Marking and Marking Tools

चिन्हन (Marking)- कार्यशाला अथवा कारखानों में जॉब तैयार करने से पहले दिये गये ड्राइंग के अनुसार मार्किंग टूल्स के द्वारा लाइने खिची जाती हैं, जिसे मार्किंग कहते हैं।

  • डॉट पंच से निशान पक्का करते समय निशानों की आपस में दूरी 3-5 mm होनी चाहिए।

मार्किंग करने के निम्नलिखित फायदे होते हैं-

  • मार्किंग करने से जॉब के अस्वीकृत होने की सम्भावना बहुत कम हो जाती हैं।
  • मार्किंग करने से जॉब पर खिची गयी लाइन कारीगर के लिए गाइड का काम करती हैं।
  • मार्किंग करने से हमे बार-बार जॉब को मापने की आवश्यकता नही होती हैं।
  • मार्किंग करने से जॉब कम समय में तैयार हो जाती हैं, अर्थात समय की बचत होती हैं।

चिन्हन माध्यम (Marking Media)-  मार्किंग मीडिया एक पदार्थ हैं जिसे जॉब की उस सरफेस पर लगाया जाता हैं, जिस पर मार्किंग करनी होती हैं। जिससे जॉब पर मार्किंग की लाइने हमे साफ-साफ दिखाई दे सके। जैसे- चाक, पर्शियन ब्लू, व्हाइट वाश, ले-आउट डाई, कॉपर सल्फेट आदि।

अतः जॉब पर मार्किंग करने के लिए मार्किंग मीडिया लगाया जाता हैं।

मार्किंग की विधियाँ (Method of Marking)- मार्किंग की विधियाँ निम्नलिखित तीन प्रकार की होती हैं-

1.निर्देश रेखा विधि (Datum Line Method)

2.केंद्र रेखा विधि (Centre Line Method)

3.टेम्पलेट द्वारा चिन्हन (Marking By Template)

1.डेटम लाइन विधि-

  • यह विधि उस समय प्रयोग की जाती है जब किसी जॉब की नजदीक की भुजाएँ अच्छी तरह फिनिश की हुई 90 डिग्री के कोण पर बनी हों।
  • इस विधि में पहले एक बेस लाइन से डेटम लाइन खीचते हैं, फिर इस रेखा की सहायता से दूसरी मार्किंग लाइन खींची जाती हैं।

2.सेंटर लाइन विधि-

  • इस विधि का प्रयोग वहाँ किया जाता हैं जहाँ मार्किंग टेढ़े-मेढ़े जॉबो पर करनी हो, जिनका कोई भी सिरा फिनिश किया हुआ नही हो।
  • ऐसे जॉब पर मार्किंग करने के लिए पहले अंदाज से (कल्पना से) सेंटर लाइन खींच ली जाती हैं, फिर इस सेंटर लाइन के आधार पर अन्य मार्किंग लाइन खींच ली जाती हैं।

3.टेम्पलेट द्वारा मार्किंग-

  • इस प्रकार की मार्किंग वहाँ की जाती हैं, जहाँ एक जैसे बहुत सारे जॉब पर एक ही जैसी मार्किंग करनी होती हैं।
  • ऐसी मार्किंग करने के लिए जॉब के आकार के अनुसार पतली शीट से टेम्पलेट बना लेते हैं, इस टेम्पलेट को जॉब पर रखकर स्क्राइबर की सहायता से मार्किंग लाइन खींच लेते हैं।

मार्किंग मीडिया के विभिन्न प्रकार (Different Types of Marking Media)- यह निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

1.सफेद रंगाई (White Wash)-

  • साधारणत: सफ़ेद रंगाई के लिए हम ब्लैक बोर्ड चाक को पानी में घोलकर तैयार करते हैं।
  • यह सबसे अधिक प्रयोग होने वाला मार्किंग मीडिया हैं।
  • इसका प्रयोग कास्ट आयरन तथा स्टील की खुरदरी सतहों के लिए किया जाता हैं।

2.पर्शियन ब्लू (Pursian Blue)-

  • इस पर की गयी मार्किंग बहुत ही एक्यूरेट तथा स्पष्ट दिखाई देती हैं।
  • इसका प्रयोग फिनिश की हुई सतहों पर किया जाता हैं।
  • इसके सूखने में बहुत अधिक समय लगता हैं, इसलिए इसका प्रयोग कम किया जाता हैं।

3.नीला थोथा या तूतिया (Copper Sulphate)-

  • इसको पानी में घोलते हैं और हमे एक नीले रंग का घोल प्राप्त होता हैं।
  • इसको जॉब की मार्किंग की जाने वाली सतह पर लगाने से यह सतह को कॉपर के रंग में परिवर्तित कर देता है।
  • इसका प्रयोग केवल स्टील के जॉब के लिए किया जाता हैं।
  • इसका प्रयोग फिनिश की हुई सतहों पर मार्किंग के लिए किया जाता हैं।

4.ले-आउट डाई (Lay-out Die) या सेल्युलोज लैक्युअर (Cellulose Lacquer)-

  • यह भी एक प्रकार की नीले रंग की स्याही हैं।
  • यह जल्दी सूख जाती हैं, यह धातु की सतह पर आसानी से फैलती हैं।
  • इसका प्रयोग भी फिनिश सतहों पर ही किया जाता हैं।
  • इसके द्वारा मार्किंग बहुत साफ-सुथरी होती हैं।

 

श्रेय- कुछ अंक अरिहंत प्रकाशन द्वारा प्रकाशित फिटर सिद्धांत पुस्तक से लिए गए हैं।

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