फिटर ट्रेड द्वितीय वर्ष Fitter Theory 2nd Year Best Class

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फिटर ट्रेड द्वितीय वर्ष Fitter Theory 2nd Year Best Class 1
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01-Screw स्क्रू भाग-02

Screw स्क्रू भाग-02

बोल्ट या Screw स्क्रू के साथ प्रयोग होने वाले औजार- बोल्ट या स्क्रू को कसने या ढीला करने के लिए निम्नलिखित औजारों का प्रयोग किया जाता हैं-

1.पेंचकस (Screw Driver)-

  1. जिस स्क्रू के हेड में स्लॉट कटे होते हैं, उन्हें कसने या ढीला करने के लिए स्क्रू ड्राइवर का प्रयोग किया जाता हैं।
  2. यह हाई कार्बन स्टील का बना होता हैं।
  3. स्क्रू ड्राइवर में मुख्यतः तीन पार्ट्स होते हैं, हैण्डल, शैंक और ब्लेड या टिप।
  4. स्क्रू ड्राइवर का साइज़ उसके शैंक की लम्बाई से लिया जाता हैं।

(Types of Screw Driver) पेचकस के प्रकार –

(i)स्टैण्डर्ड स्क्रू-ड्राइवर –

  • यह हल्के तथा भारी दोनों कार्यो के लिए प्रयोग किया जाता हैं।
  • इसकी शैंक गोल या वर्गाकार होती हैं।
  • गोल शैंक वाले स्क्रू ड्राइवर हल्के कार्यों के लिए प्रयोग किये जाते हैं।
  • वर्गाकार शैंक वाले स्क्रू ड्राइवर भारी कार्यों के लिए प्रयोग किये जाते हैं।

(ii)हैवी ड्यूटी स्क्रू ड्राइवर-

  • इस स्क्रू ड्राइवर की ब्लेड तथा शैंक चपटी होती हैं।
  • इसका प्रयोग अधिकतर कारपेंटर करते हैं।

(iii)फिलिप्स स्क्रू ड्राइवर-

  • जिस स्क्रू के हेड में क्रॉस-स्लॉट बना होता हैं उसे कसने या ढीला करने के लिए फिलिप्स स्क्रू ड्राइवर का प्रयोग किया जाता हैं।
  • इसे प्लस स्क्रू ड्राइवर भी कहते हैं।

(iv)ऑफसैट स्क्रू ड्राइवर-

  • इस स्क्रू ड्राइवर के दोनों सिरों को चपटा करके एक-दूसरे के विपरीत दिशा में 90 डिग्री पर मोड़ दिया जाता हैं।
  • ऑफसैट स्क्रू ड्राइवर का प्रयोग तंग स्थानों पर किया जाता हैं।

(v)विशेष उपयोग के लिए स्क्रू ड्राइवर-

  • कुछ स्क्रू ड्राइवर के शैंक पर कुचालक पदार्थ (इंसुलेशन) चढ़ा होता हैं जिससे इलेक्ट्रीशियन को काम करते समय शॉक लगने का खतरा कम हो जाता है। इसे स्पेशल स्क्रू ड्राइवर में रखा गया हैं।
  • कुछ ऐसे स्थान जहाँ उचांई कम होती हैं वहाँ के लिए छोटे साइज़ के स्क्रू ड्राइवर बनाये जाते हैं। छोटे साइज़ वाले स्क्रू ड्राइवर भी स्पेशल स्क्रू ड्राइवर के अंतर्गत आते हैं।

2.स्पैनर-

  • स्पैनर हाई टेन्साइल स्ट्रेंथ वाली एलाय स्टील का बना होता हैं।
  • इसका प्रयोग हेक्सागोनल या वर्गाकार बोल्ट को कसने या खोलने के लिए किया जाता हैं।
  • इसको जंग से बचाने के लिए इस पर क्रोमियम की परत चढ़ा दी जाती हैं।

यह निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

(i)खुला सिरा स्पैनर (Open Ended Spanner)-

यह सबसे अधिक प्रयोग होने वाला स्पैनर हैं। यह दो प्रकार का होता हैं-

(a)सिंगल एंडेड स्पैनर-

  • इस स्पैनर के केवल एक ही सिरे पर खाँचा बना होता हैं।
  • इसके द्वारा एक ही साइज़ के बोल्ट को खोला या कसा जा सकता हैं।
  • इसका सिरा अक्ष से 15 डिग्री पर ऑफसेट होता हैं।

(b)डबल एंडेड स्पैनर-

  • इस स्पैनर के दोनों सिरों पर खाँचा बना होता हैं।
  • दोनों खाँचा अलग-अलग साइज़ का होता हैं।
  • इसके द्वारा दो अलग-अलग साइज़ के बोल्ट को खोला या कसा जा सकता हैं।
  • इसका सिरा भी अक्ष से 15 डिग्री पर ऑफसेट होता हैं।
  • इसे D.E. स्पैनर भी कहते हैं।

(ii)रिंग स्पैनर (Ring Spanner)-

  • इसे क्लोज एंडेड स्पैनर भी कहते हैं।
  • इसके दोनों सिरे गोल तथा कुछ ऑफसेट होते हैं।
  • रिंग स्पैनर के एक सिरे पर एक रिंग के अंदर 12 नॉच कटे होते हैं।
  • इसीलिए इसे 12 नॉच बॉक्स स्पैनर के नाम से भी जानते हैं।

(iii)विशेष कार्यों हेतु स्पैनर- कुछ स्पैनर विशेष कार्यों हेतु प्रयोग किये जाते हैं जो निम्नलिखित हैं-

(a)ट्यूबलर बॉक्स स्पैनर-

  • इस स्पैनर के दोनों सिरे अलग-अलग साइज़ के बोल्ट के आकार के अनुरूप बने होते हैं।
  • अर्थात इसकी सहायता से दो साइज़ के बोल्ट को एक स्पैनर द्वारा खोला या कसा जा सकता हैं।
  • इसका प्रयोग गहराई में बोल्ट या स्क्रू को कसने या खोलने के लिए किया जाता हैं।

(b)सॉकेट स्पैनर-

  • इसके द्वारा एक ही साइज़ के बोल्ट या स्क्रू (Screw) को कसा या खोला जा सकता हैं।
  • इसके द्वारा भी गहराई में बोल्ट या स्क्रू (Screw) को कसने या खोलने के लिए प्रयोग किया जाता हैं।
  • यह ट्यूबलर बॉक्स स्पैनर की अपेक्षा अधिक गहराई में में प्रयोग किया जा सकता हैं।

(c)एडजस्टेबल स्पैनर-

  • इसका साइज़, इसकी कुल लम्बाई से लिया जाता हैं।
  • यह ओपेन एंडेड स्पैनर का विकसित रूप हैं।
  • इसके जबड़े की साइज़ को एडजस्ट किया जा सकता हैं अर्थात एक ही स्पैनर से कई साइज़ के नट व बोल्ट को खोला व कसा जा सकता हैं।

(d)हुक स्पैनर-

  • यह ऐसे नट को खोलने या कसने के लिए प्रयोग किया जाता हैं  जो गोल होते है तथा उनकी परिधि पर खाँचा कटा होता हैं।

3.टार्क रिंच-

  • इस रिंच के द्वारा नट या बोल्ट पर लगाये जाने वाले बल को नियंत्रित किया जा सकता हैं।
  • नट को ख़राब होने या मिस होने या फटने से बचाने के लिए इस रिंच का प्रयोग किया जाता हैं।
  • इसके द्वारा नट को खोलते समय उसके टूटने की सम्भावना नहीं रहती।
  • इसका प्रयोग ऑटोमोबाइल में किया जाता हैं।

 

श्रेय- कुछ बिंदु अरिहंत प्रकाशन द्वारा प्रकाशित फिटर थ्योरी पुस्तक से लिए गए हैं।

 

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