फिटर ट्रेड द्वितीय वर्ष (Fitter Theory 2nd Year)

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फिटर ट्रेड द्वितीय वर्ष (Fitter Theory 2nd Year) 1
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02- Nut, Pin and Key नट, पिन और की

लॉकिंग युक्तियाँ: नट, पिन और की (Locking Devices : Nut, Pin and Key)

Nut,Pin and Key – जब मशीने लगातार काम करती हैं तो उनमे कम्पन होता रहता हैं, जिससे उनके पार्ट्स में लगे स्क्रू ढीला हो जाते हैं तथा मशीनों से आवाज आने लगती हैं और टूट-फुट की सम्भावना बढ़ जाती हैं। इन सबसे बचने के लिए स्क्रू के साथ नट का प्रयोग किया जाता हैं, यही लॉकिंग डिवाइस कहलाते हैं। मशीन में लॉकिंग युक्तियों के रूप में मुख्यतः नट, पिन तथा ‘की’ का उपयोग किया जाता हैं।

नट (Nut)-

  • नट, माइल्ड स्टील के बनाये जाते हैं।
  • नट, हेक्सागोनल या वर्गाकार आकृति का होता हैं, जिसके बीच में छेद होता हैं तथा चूड़ी कटी होती हैं।
  • इसका प्रयोग बोल्ट, स्टड या स्क्रू पर किया जाता हैं।

नट निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

1.हेक्सागोनल नट (Hexagonal Nut)-

  • यह सबसे अधिक प्रयोग होने वाला नट हैं।
  • इसमें 6 फलक होते है, इसलिए हेक्सागोनल बोला जाता हैं।
  • इस नट के एक फेस को या दोनों फेस को 30 डिग्री पर चैम्फर कर दिया जाता हैं।
  • पतले हेक्सागोनल नट का उपयोग लॉक नट के रूप में किया जाता हैं।

2.वर्गाकार नट (Square Nut)-

  • यह नट वर्ग की आकृति में होते हैं तथा इसमें 4 फलक होते हैं।
  • इन पर प्लायर या स्पैनर की पकड़ काफी मजबूत होती हैं तथा स्लिप होने का भय कम रहता हैं।
  • यह नट अधिकतर लकड़ी के कामो में प्रयोग किये जाते हैं।
  • इस नट के फेस भी 30 डिग्री पर चैम्फर किये होते हैं।

3.टी नट (‘T’ Nut)-

  • ‘T’ नट का प्रयोग स्टड के साथ किया जाता हैं।
  • इसका प्रयोग अधिकतर मशीन टूल पर होल्डिंग डिवाइस या जॉब को फिक्स करने के लिए किया जाता हैं।

4.कॉलर या फ्लैंज नट (Collar or Flange Nut)-

  • इसका उपरी हिस्सा हेक्सागोनल नट के समान होता हैं जबकि नीचे की ओर का हिस्सा वाशर के समान गोल होता है।
  • इसकी पकड़ मजबूत होती हैं।
  • इसका प्रयोग बोल्ट से बड़े साइज़ के होल पर भी किया जा सकता हैं।

5.कफ नट (Cough Nut)-

  • इसे डोम नट के नाम से भी जानते हैं।
  • यह भी हेक्सागोनल नट के समान होता हैं जो कि एक सिरे पर बंद होता हैं।
  • बंद वाला सिरा गुम्बद के आकार का होता हैं।
  • इसका प्रयोग मशीनों में बाहर की ओर किया जाता हैं जो कि चूड़ियों को बाहरी वातावरण तथा गंदगी से बचाते हैं।

6.कैप नट (Cap Nut)-

  • इसका भी एक सिरा कफ नट के समान बंद होता हैं।
  • दोनों नट में अंतर यह है कि कफ नट का बंद सिरा गोलाकार या गुम्बद आकृति में होता हैं जबकि कैप नट का बंद सिरा प्लेन या फ्लैट होता हैं।
  • यह भी चूड़ियों की बाहरी वातावरण से सुरक्षा करता हैं।
  • इसका प्रयोग वहा भी किया जाता हैं जहाँ हाइड्रोलिक के लीकेज के खतरा रहता हैं।

7.कैप्स्टन नट (Capstan Nut)-

  • यह नट बेलनाकार आकृति में बना होता हैं।
  • इसको खोलने या कसने के लिए इसकी परिधि या फेस पर होल बने होते हैं।
  • यदि परिधि पर होल बना हुआ है तो उसे कसने या खोलने के लिए हुक स्पैनर तथा यदि फेस पर होल बना हुआ है तो उसे कसने या खोलने के लिए फेस स्पैनर का प्रयोग किया जाता हैं।

8.राउंड नट या रिंग नट (Round Nut or Ring Nut)-

  • यह नट भी कैप्स्टन नट के समान बेलनाकार आकृति में बना होता हैं।
  • इन दोनों नट में अंतर यह हैं कि इसको खोलने या कसने के लिए इसकी परिधि पर होल की जगह स्लॉट बने होते हैं।
  • इसको खोलने या कसने के लिए हुक स्पैनर का प्रयोग किया जाता हैं।
  • इस नट का प्रयोग बड़े साइज़ के बोल्ट या बियरिंग स्लीव पर किया जाता हैं।

9.नर्ल्ड नट (Knurled Nut)-

  • इस नट को हाथ से ही आसानी से खोला या कसा जा सकता हैं।
  • इस नट की परिधि पर नर्लिंग किया गया होता हैं, नर्लिंग का अर्थ हैं सतह को खुरदरा बनाना जिससे इस पर हाथो की पकड़ मजबूत होती हैं।
  • इस नट का प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता हैं जहाँ हमे बार-बार नट को खोलने और कसने की जरूरत पड़ती हो। जैसे- मापने वाले औजारों आदि में।
  • इसे थम्ब नट के नाम से भी जानते हैं। क्युकी इसे हाथ से खोल या कस सकते हैं।

10.विंग नट या फ्लाई नट (Wing Nut or Fly Nut)-

  • इस नट में दो विंग लगा होता हैं इसीलिए इसे विंग नट कहते है।
  • यह नट भी वहाँ प्रयोग करते है जहाँ हमे बार-बार नट को खोलने व कसने की आवश्यकता रहती हैं।
  • इसे भी हाथ की सहायता से ही खोला या कसा जा सकता हैं।
  • यह नट हैक्सा, बेवेल स्क्वायर, हैण्ड वाइस आदि में लगा होता हैं।

 

श्रेय- कुछ  बिंदु अरिहंत प्रकाशन द्वारा प्रकाशित फिटर थ्योरी पुस्तक से लिए गए हैं।

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